ध्वजारोहण 2026: नाशिक कुंभ मेले की शुरुआत करने वाला ध्वजारोहण
ध्वजारोहण क्या है?
ध्वजारोहण का अर्थ है "ध्वज फहराना"। नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ के लिए यह पवित्र अवधि की औपचारिक शुरुआत है: ध्वज फहराते ही कुंभ मेला आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो जाता है। इसकी घोषणा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाली बैठक में, प्रमुख अखाड़ों के संतों व महंतों की उपस्थिति में की गई।
एक नज़र में मुख्य जानकारी
| तारीख | शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 |
|---|---|
| समय | दोपहर 12:02 बजे (आधिकारिक घोषणा के अनुसार) |
| स्थान | रामकुंड, पंचवटी, नाशिक (उसी दिन त्र्यंबकेश्वर में भी ध्वजारोहण) |
| क्या दर्शाता है | सिंहस्थ अवधि का प्रारंभ |
| आगे क्या | मुख्य शाही/अमृत स्नान: 2 अगस्त, 31 अगस्त और 11–12 सितंबर 2027 |
क्या ध्वजारोहण के लिए यात्रा करनी चाहिए?
31 अक्टूबर 2026 का समारोह शुरुआती पड़ाव है, मुख्य स्नान पर्व नहीं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अगस्त-सितंबर 2027 की शाही स्नान तिथियों के आसपास अपेक्षित है। यदि आप कुंभ की शुरुआत देखना चाहते हैं, या बड़ी भीड़ से पहले शांत यात्रा पसंद करते हैं, तो उद्घाटन का दिन नाशिक के घाटों और मंदिरों को उत्सव के माहौल में देखने का अवसर है। उस दिन रामकुंड के आसपास यातायात प्रतिबंध और सुरक्षा व्यवस्था की अपेक्षा रखें।
उस दिन के लिए व्यावहारिक सुझाव
- जल्दी बुकिंग करें। पंचवटी के पास नाशिक के होटल उत्सव की तारीखों पर जल्दी भर जाते हैं। हमारी कहाँ ठहरें गाइड देखें।
- एक शाम पहले पहुंचें। आयोजन के दिन रामकुंड व पंचवटी के पास सड़क प्रवेश प्रायः सीमित रहता है।
- अंतिम हिस्सा पैदल तय करने की योजना रखें। घाटों तक अंतिम दूरी पैदल चलनी पड़ सकती है। आरामदायक जूते और पानी की बोतल साथ रखें।
- आधिकारिक अपडेट देखें। पार्किंग, शटल व प्रवेश व्यवस्था की घोषणा अधिकारी आयोजन से कुछ पहले करते हैं।
मुंबई, पुणे व अन्य शहरों से मार्ग के लिए नाशिक कैसे पहुंचें देखें। 2027 की सभी पुष्ट तिथियों के लिए तिथियां व शाही स्नान कार्यक्रम देखें।
स्रोत: सिंहस्थ कार्यक्रम की घोषणा पर डेक्कन क्रॉनिकल व ईटीवी भारत की रिपोर्टिंग। यह साइट स्वतंत्र है और किसी आधिकारिक प्राधिकरण से संबद्ध नहीं है।